आओ चले सिक्किम

कुछ जगह ऐसी भी हैं जनाब
जो भूले भुलाई नहीं जाती
आइये आपको लेके चलता हुँ मेरे देश भारत के प्यारे राज्य सिक्किम मेँ वैसे तो ये काफी छोटा राज्य है! पर यहाँ के लोग और खूबसूरती प्राकृतिक नज़ारे की बात ही कुछ ख़ास है !
मेरा ये सफर शुरू होता है मेरे देश की राजधानी दिल्ली से सुबह 7 बजे तय समय पर मेँ स्टेशन पहुँचता हुँ! और मेँ ट्रैन से न्यू जलपाईगुड़ी जो यहाँ का नजदीकी रेलवे स्टेशन है वहां पहुँचता हुँ दूसरे दिन दोपहर के 2 बज चुके होते है मेँ स्टेशन के बाहर निकलने पर सब से पहले खाना ढूँढता हुँ ! खाना खाने के बाद मेँ कार ढूंढ़ता हुँ(अगर आप शाकाहारी है तो आपको थोड़ी दिक्कत हो सकती है मुझे भी हुई थी ) जो मुझे मेरे सपनो के शहर गंगटोक ले के जाये कुछ 15 मिनिट मे मेँ एक कार ढूंढ़ता हु जो मुझे मेरे बजट के हिसाब से 1800 रूपये मेँ मिल जाती है (आप बस के द्वारा भी जा सकते है बस का किराया ज्यादा से ज्यादा 300 लगेगा )
मै रास्ते मेँ कार रुकवाते हुए जाता हुँ और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य से अबगत होता हुआ गंगटोक पहुँचता हुँ !(यहाँ का अनुभव आगे डालूंगा ) 3 दिन यहाँ रुकने के बाद मेँ निकलता हुँ वहां जहाँ का चित्र मैंने पोस्ट मेँ डाला है ! इस जगह को रावंगला(ravangla) तथा तथागता टसल के नाम से भी जाना जाता है !यहाँ पर बुद्ध जी की बहुत बड़ी मूर्ति है तथा यहाँ पर बहुत बड़ी monestry भी है !
मेँ गंगटोक से सुबह 8 बजे निकलता हुँ और 10:30 पर pabong पहुँचता हुँ ! और यहाँ रुक कर मेँ मैग्गी और मोमोस खाता हुँ मुझे पहाड़ो पर मैग्गी खाना बहुत पसंद है !
(आप अपने साथ पानी ज़रूर रखे )
मेँ ड्राइवर से कुछ बाते करता हुआ एवं सिक्किम के बारे मेँ पूछता हुआ पहुंच जाता हु रावंगला ये वही जगह है जहाँ मुझे आना था ! मेँ बुद्धा पार्क की ओर जाता हु यहाँ पर आपको 90 रूपये का टिकट लेना होगा(यह 10 बजे से 6:30 तक खुला रहता है) टिकट लेने के बाद मेँ पार्क के अंदर जाता हुँ और अंदर जाते ही मुझे दिखाई देती है बुद्ध जी की विशाल मूर्ति जिसको देखकर मेँ आश्चर्यचकित हो जाता हुँ यहाँ जाके दिल को मानो सुकून मिला हो अंदर जाके मानो ऐसा लगता है जैसे स्वर्ग मे आ गया हुँ पार्क लग रहा था मानो आसमान पे बनाया गया हो बुद्ध जी के पीछे काले बादल ऐसे लग रहे थे जैसे पास मे ही हो शाम के 6 बज चुके थे मे लगतार देखे ही जा रहा था अंधेरा होने चला था पक्षी घोसले मे लौटने को हो चले थे मौसम बिल्कुल ठंडा हो गया था सभी पर्यटक भी वापिस जाने की तैयारी कर रहे थे मे हैरान था आज तक मैंने ऐसी जगह नहीं देखी थी मेरा जाने का मन नहीं था तभी ड्राइवर का कॉल आता है वो मुझसे चलने को बोलता है! मै उससे 10 मिनिट की और बोलता हुँ और कुछ तस्वीर लेता हुँ और वापिस जाने की सोच कर बुरा लगता है पर यहाँ 7 बजे तक सबको बाहर जाना होता है इसलिए मै भी बाहर आता हुँ बाहर रोड पे चारो ओर बर्फ तथा हरे पेड़ दिखाई दे रहे थे मै कार मै बैठा तभी बारिश होने लगी मानो प्रकृति भी चाहती थी की मै ना जाऊ कुछ देर बाद बारिश रुकने के बाद मै गंगटोक पहुँचता हुँ
इस बाते को 3 साल हो गए पर जब भी इस जगह की याद आती है तो मन विचलित हो उठता है!
काश की फिर से उस जगह जा पाउँ
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा अनुभव है तो मुझे बताइये
♥️ कुछ जगह ऐसी भी है जनाब ♥️
♥️जो भूले से भी भुलायी नहीं जाती ♥️
अगर आपको किस्सा अच्छा लगा तो और लोगो तक पंहुचाये और कमेंट मै बताये की आपको कैसा लगा
अगर किसी भी जगह जाना चाहते है या कुछ पूछना चाहते है तो ज़रूर पूछे

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